Wednesday, 25 February 2026

आज का सृजन २

Vrajendra Nagar 
शुद्ध जल जवाबदार ?
पानी पानी चिल्लाकर पानी उतार 
देते हैं 
स्वच्छता के काम आने वाले को 
अशुद्ध कर देते हैं 
स्वयं ही असावधान है खुद के स्वास्थ्य
 के लिए 
गंदा पानी पीकर, बीमार दूसरों को 
कर देते हैं 
पिपासा बढ़ती है, लालच के कारण 
फिर अन्य बदनाम क्यों
दूध में पानी मिलाकर दूध पीकर खुद 
खुश होते हैं 
इंदौर में पानी गंदा किया किसने है ?
अनजान है 
फिर आम को बदनाम कर पनियाते 
अन्य को हैं 
खुद ही जल स्रोत को दूषित करके 
दूषण फैलाते 
व्यवस्था की बुनियाद को भी तो 
अव्यवस्थित करते 
गंदगी नाले में डाल गंदा नाला बना
कर स्वयं बदनाम करते 
माना कि जल को शुद्ध रखना अपनी
जवाबदारी नहीं है 
शुद्ध जल पीने की जवाबदारी तो खुद
की ही है ना 
जितने जवाबदारी मुहैया कराने वाले 
दोषी हैं उतने ही हम खुद भी हैं
आईने पर धूल जमीं है अतः आइने से 
परहेज करते हैं 
खुद के द्वारा की गई गंदगी का जवाब
गैरों से मांगते 
सुबह-सुबह उठकर अपना मुंह क्या
खुद ही नहीं धोते हैं 

व्रजेंद्र नागर 
251 श्री मंगल नगर इंदौर
,🌤️💐💐
आसमान की ओर उछाला हुआ 
सिर पर आ गिरे 
जवाबदार कौन ?
राही के सिर पर तीसरी मंजिल 
से खपरैल गिरे 
जवाबदार कौन ?
उड़ते परिंदे का पंख फड़फड़ाते
 धागे में उलझे 
जवाबदार कौन ?
उड़ती पतंग से खग तकरा जाए 
पतंग फट जाये 
जवाबदार कौन ? 
हवन करते हुए हाथ जल जाए 
इलाज समय पे ना मिले 
जवाबदार कौन ?
हत्यारा मौन रह कर आंसू बहाते
सजा कोई दूसरा पाये 
जवाबदार कौन ? 
मंथन करने पर हलाहल आ जाए
नवनीत मिल न पाये 
जवाबदार कौन ?
धनवंतरी इलाज करें और यम भी
अपना नियम निभाये
जवाबदार कौन ?
बिल्ली के भाग से छींका टूटे, बिल्ली 
का ही सिर भी फूटे
जवाबदार कौन ?

व्रजेंद्र नागर 
251 श्री मंगल नगर इंदौर

Tuesday, 24 February 2026

आज का सृजन १

आज के सृजन में
   श्री व्रजेन्द्र नागर एवं श्री अखिलेश जैन


 विडम्बना
वनवासी तपते हैं या तपाये
जाते 
प्रकृति से ओत: प्रोत हैं सरल 
प्रताड़े जाते 
मानव स्वभाव है व प्रकृति भी 
है उसकी 
भवन सृजन के पूर्व गड्ढे बहुत 
खोदे जाते 
आधार जीवन का कैसा है नहीं 
जानते 
सिर्फ कंगूरे पर फड़फड़ा कर 
गुटर्गू करते 
आनंद पाने के पूर्व ही उठाते हैं 
जोखिम 
हिम का अंत होने पर ही बाहर 
भी है आती 
बहार की चाहत में भी गर्त व 
शिखर को तलाशते 
गर्मी के मौसम में ठंडक पाने
जल के निकट जाते 
क्रोध करते हैं खुद शांति को पाने 
के लिए 
न जाने क्यों जीवन के लिए मौत 
हैं चाहते 

 सफलता का चरम
सफलता यूं ही नहीं मिलती बीज को
मिट्टी में दबना होता है
अंकुरण के साथ ही विकसित हो लंबी 
प्रतीक्षा करता है
लालिमा से हरितिमा पाकर पल्लवित 
होता है 
समय पाकर गुम्फित भी होता है कली 
का स्पंदन जीवन्त होता है 
विस्तार पाकर सुमन ही सुरभित दुनिया 
करता है 
प्रकृति सुमन पाकर फलवती हो जाती
शिखर जाती है 
साधना और तप से ही फल परिपक्व हो
रस देता है
सफलता पाने के बाद वह न अवरुद्ध
कभी होता है 
बड़ी यातनाएं सहकर ही रस संवर्धन 
करता है 
इस पर भी लोग चखकर अनुभूति ही
बताते हैं 
जैसी प्रकृति है वैसा ही फल मधुरिम या
कटु होता है 
सफलता पाते ही दिल सागर सा उदात्त
लहराता है 
उद्भट और उत्तंग लहरें उठ कर गर्जन
 व तर्जन करती रहती है
सागर सा विशाल हृदय उन्हें शीतल 
कर देता है 
हृदय का उथला पन कभी भीसंरक्षण 
न देता है 

व्रजेंद्र नागर 
251 श्री मंगल नगर इंदौर

[07/12/2025, 1:10 pm] Akhilesh Jain SAI: 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

न कर बयां,
           दर्द उधार का




न पता तुझे 
दर्द है, कहां
न है हर दर्द की 
दवा यहां,

देख भर के 
एक नज़र जहान,
हर शख्स है,
परेशान यहां,

छोड़ दे 
किस्सा हार का,
गा गीत,
बहार का,

किस ने देखा,
वो पल,
जी ले आज,
कौन सा कल?

न कर बयां 
दर्द उधार का 
देख अपना,
छोड़ संसार का,


©अखिलेश जैन "अखिल"

"भारत बने प्रमाण"

सोने वाले जाग जरा,
अरुण किरण ले आग,
स्वप्न देखे जो निंद्रा में 
हो कर्मरत कर साकार,

आराधन कर आराध्य,
कर नित ग्रह,देव याग 
जग को दे,संभव भाग,
अकिंचन न रहे समाज,

आदि से अनंत प्रकृति,
कर सब उचित विचार,
शुभारंभ कर जीवन में
षड रिपु का कर त्याग,

संग संग का कर संगठन
एकजुट हो सब परिवार
संकल्पों संग सुसज्ज हो
कर दनुज शक्ति संहार,

दिव्य बनें अखिल मनुज
हो देवगुण सकल व्याप्त
राज काज धर्म नीति का 
भारत बने सहर्ष प्रमाण

©अखिलेश जैन "अखिल"
८/१२/२०२५

Monday, 16 February 2026

मीटिंग १४ फरवरी २०२६

सोसायटी ऑफ ऑथर्स की साहित्यिक और डिजिटल क्रियेशन पर आधारित विशिष्ठ सभा, दिनांक १४ फरवरी को कुन्द कुन्द ज्ञानपीठ में आयोजित की गई। मुख्य अतिथि डॉ. ज्योति किरण जैन समाजसेवी एवं लेखिका ने उद्बोधन में कहा कि लेखक का मुख्य धर्म है कि वह समाज के जन जन की पीड़ा, दर्द, सुख-दुःख, व्याप्त नैतिक-अनैतिक आचार व्यवहार तथा उसके जीवन में अनुभूत प्रेरक तथा जीवनोपयोगी प्रसंगों को अवश्य लिखें। प्रिन्ट मीडिया के माध्यम से अपनी बात सीमित क्षेत्र तक पहुंचती है। डिजिटल क्रियेशन का महत्व बताते हुए कहा कि वर्तमान में बहुप्रचलित सोशल मीडिया के माध्यम से आपकी बात सभी उम्र के लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच सकती है। इसका सदुपयोग करें दुरुपयोग नहीं। संस्था सचिव रामनारायण सोनी ने बताया कि लेखन के परम्परागत स्वरूप के साथ साथ एडवान्स्ड डिजिटल क्रियेशन के विभिन्न आयामों का उपयोग करके लेखन किस तरह शीघ्र छपने एवं सोशल मीडिया के हेतु उपयोग करने लायक तथा प्रभावी बना सकते हैं। संस्था इस हेतु शीघ्र ही निःशुल्क वर्कशाप आयोजित करेगी। जिसमें ब्लॉग लेखन, रिकार्ड कीपिंग, काव्य के पोस्टर मेकिंग, यूट्यूबर, ऑडियो - विजुअल का साहित्य सृजन में उपयोग के विषय शामिल होंगे। लेखन, कविता गायन आदि में ए.आय. के भरपूर उपयोग पर कार्यशाला भी होगी। 
सभा में डॉ. उपेन्द्र धर, भीमसिंह पंवार, अखिलेश जैन, महेन्द्र सांघी, राजेश रामनगीना, विपिन जैन, व्रजेन्द्र नागर, शोभारानी तिवारी, रशीद अहमद शेख, ओमप्रकाश जोशी, बालकराम शाद, डॉ. स्वातिसिंह, रामनारायण सोनी आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रचनाकारों ने गीत, गजल का पाठ किया। अध्यक्ष्यीय उद्बोधन रवीन्द्र पहलवान ने दिया। संचालन संस्था सचिव रामनारायण सोनी ने किया। 

रामनारायण सोनी
सचिव

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माह अप्रैल 2026 की विशेष गतिविधियाँ

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