Monday, 12 January 2026

संस्था का संकल्प पत्र

हमारा संकल्प- पत्र और रोड मेप

१ . प्रतिमाह मासिक सभा का अनिवार्य रूप से आयोजन
२. जन्म, मरण, परण और स्मरण। प्रतिमाह की सभा के प्रथम सत्र में
३. विधायें :- गद्य, पद्य, लघुकथा, लोकगीत आदि
४. भाषा :- हिन्दी, उर्दू, संस्कृत, अंग्रेजी और आंचलिक भाषा-बोली
५. संस्कृति :- प्रत्येक माह में पड़ने वाल पर्वों, त्यौहारों, विश्व दिवस आदि को सांकेतिक, सामूहिक स्वरूप में मनाना।
६. प्रत्येक सदस्य द्वारा मासिक सभा में रचना पाठ
७. नवोदित लेखकों को प्रोत्साहन 
८. सदस्यों की नवीन कृतियों का लोकार्पण कराना
९. साझा संकलन तैयार करना
१०. संस्था में हमने पदाधिकार नहीं पदेन सेवा का दायित्व लिया है। 

सोसायटी ऑफ ऑथर्स की गतिविधियाँ

सोसायटी ऑफ ऑथर्स की गतिविधियों की मासिक और वार्षिक संक्षेपिका

_*Outstanding academic performance of our institution and cooperation of honourable members.*_


१) सांस्कृतिक :-

दिनांक १० जनवरी २०२६, विशिष्ठ सभा 

सभा के प्रारंभ में हिन्दी दिवस १० जनवरी, युवा दिवस ११, जनवरी, लोहडी १३ जनवरी, मकर संक्रान्ति १४ जनवरी, गणतंत्र दिवस २६ जनवरी के सांस्कृति महत्व और गरिमा का स्मरण करते हुए शुभकामनाएँ प्रसारित की गई।

२) साहित्यिक:-

सोसायटी ऑफ ऑथर्स की लोकप्रिय, लोकमंगलमयी, और उत्कृष्ठ साहित्यिक श्रेष्ठता को देखते हुए आज शहर के तीन प्रबुद्ध साहित्यकारों, श्रीमती मीना अग्रवाल, डॉ. स्वाति सिंह, डॉ. प्रगति जैन, ने संस्था की सदस्यता ग्रहण की। उन्हें धन्यवाद और आभार प्रस्तुत किया गया।  

३) सभा में १० बिन्दुओं का संस्था का संकल्प-पत्र वाचन किया गया।

४) संस्था ने नवाचार के तहत भेंट में सामग्री

के बजाय अवली रचना कारों ने (श्री रामनारायण सोनी, डॉ. अनुपमा जैन, श्री रशीद अहमद शेख ने अपनी अपनी कृतियाँ अतिथि महोदया को उपहार स्वरूप भेंट की।

५) सचिव रामनारायण सोनी ने संस्था की २०२५ की गतिविधियों से सदन को अवगत कराया।

६) श्रेष्ठ उपलब्धि (वार्षिकी) - गत एक केलेंडर वर्ष में -

  अ) ५ अलग अलग गरिमामय कार्यक्रमों मे ५ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। 

  आ) प्रत्येक मासिक सभा में श्रेष्ठ साहित्यकार, समाज सेवी को मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित किया गया जिनसे हमारे सदस्य लाभान्वित हुए।

  इ) हर माह में पड़ने वाले तीज-त्यौहार को सांकेतिक रूप से सभा कक्ष में भी मनाया जाता है।

७) कुन्द कुन्द ज्ञानपीठ का आभार, जो हर माह स्थान और सुविधा प्रदान करती है।


    रामनारायण सोनी

    सचिव, सोसायटी ऑफ ऑथर्स, इन्दौर

विशिष्ठ सभा १० जनवरी २०२६

सोसायटी ऑफ ऑथर्स, इन्दौर की विशिष्ठ सभा

सोसायटी ऑफ ऑथर्स की सांस्कृतिक और साहित्यिक विशिष्ठ सभा, दिनांक १० जनवरी को कुन्द कुन्द ज्ञानपीठ में आयोजित की गई। मुख्य अतिथि डॉ. प्रगति जैन शिक्षाविद् एवं लेखिका ने उद्बोधन में कहा कि हमें अपने लेखन में मौलिकता, सार्थकता और समाज की समरसता का विशेष ध्यान रखना चाहिये। युवा पीढ़ी का ध्यान आज संस्कृति, संस्कार, नैतिकता और सामाजिक मेलजोल से हट कर आधुनिक आमोद के संसाधनों की ओर हो गया है। ऐसे में हमारा लेखन का दायित्व और बढ़ गया है। इसलिए आज के मीडिया संसाधन के माध्यम से रचना कर करके अपनी बात उन तक जरूर पहुंचावें। जैसे समद्र की लहरों में चपलता तो होती है पर उसमें समुद्र की आत्मा निवास करती हैं वैसे ही युवाओं को उनको अपनी अस्मिता को पहचानना चाहिये। अपने आसपास देखें तो लेखन के ऐसे विषय रोज मिल जाते हैं। लेखक समाज के लिये क्रान्तदर्शी होता है।
सभा में सुरेश रायकवार, शोभारानी तिवारी, मीना अग्रवाल, आर. डी. गुप्ता, रशीद अहमद शेख, डॉ. पी.के. माथुर, सुनील मुसाफिर, ओमप्रकाश जोशी, बालकराम शाद, डॉ. स्वातिसिंह, रामनारायण सोनी आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रचनाकारों ने गीत, गजल, लघुकथा का संदेशपरक एवं सार्थक सरस पाठ किया। कार्यक्रम के अन्त में संस्था की संरक्षक डॉ. अनुपमा जैन ने प्रेरक और रवीन्द्र नारायण पहलवान ने अध्यक्ष्यीय उद्बोधन दिये। 
संस्था सचिव रामनारायण सोनी ने संचालन किया। 
रामनारायण सोनी
सचिव

Saturday, 10 January 2026

अम्मा की रामायण

दिनांक १० जनवरी, २०२६ को कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ में डॉ. स्वाती सिंह ने सत्य घटना पर आधारित एक कहानी पढ़ी जो जिजीविषा से परिपूर्ण थी। 

अपने पाठकों और मित्रों को समर्पित

अम्मा की रामायण
भरत, माँ कैकेई से गुस्से में कहते हैं कि जिसने भी मेरे भैया राम को वनवास भेजा है, मुझे लगता है कि मैं उसका अभी वध कर दूं, पर मां, अगर मैंने ऐसा किया, तो राम भैया मुझे ही त्याग देंगे, इसीलिए मैं चुप हूं ... । 
जब राम वनवास से लौटे, तो सबसे पहले अपनी मां, कैकई के पास गये ... मां कैकेई ने उन्हें भाव विभोर होकर, गले से लगा लिया। ... 
आदि आदि न जाने कितने सुंदर सुंदर भाव, अम्मा अपने पेन से कागज पर उकेर रहीं थीं। दरअसल, अम्मा रामायण लिख रहीं थीं, वह भी अपने शब्दों में। अब तक वे बड़े बड़े तीन रजिस्टर भर चुकी थीं और उनकी लिखावट के तो, क्या ही कहने ... ऐसी कि जैसे प्रिंट की गई हो। रोज, पूजा के बाद अम्मा, बिना समय गंवाए रामायण लिखने बैठ जातीं। कभी कभी तो लिखते लिखते सवेरा हो जाता। फ़िर सुबह, मनु के डर से उन्हें सोना पड़ता और जब वे सवेरे देर तक सोतीं, तो मनु चिंता में पड़ जाता और उनके उठने पर पूछता कि क्या हुआ ... तबीयत तो ठीक है न, मां? तो अम्मा बड़े प्यार से हंसकर कहतीं कि बेटा, राम भगवान कल हमसे सुबह चार बजे तक लिखवाते रहे, तो मनु कहता 'सब ठीक है मां, बस अपनी तबियत का ध्यान रखना।' अम्मा की लगन देखकर ऐसा लगता कि वे अपने एक एक अनुभव को कागज पर उतारना चाहतीं हों। जिसके लिए शायद उनके पास समय की कमी के साथ साथ, स्वास्थ्य भी एक चुनौती था। अस्सी साल की उम्र में उन्हें पहले ब्रेस्ट कैंसर और फिर छै महीने के अंदर ही यूटरस के कैंसर का सामना करना पड़ा। पर जब वे ठीक हुईं, तो अकेली पड़ी अम्मा को रामायण लिखने की स्वप्रेरणा मिली। दरअसल मनु की बहू अपने बच्चों और मायके में ज्यादा व्यस्त रहती। फ़िर बाबूजी के बाद अम्मा के पास काम भी तो नहीं रह गया था। अतः उन्होंने रामायण लिखने का सोचा। नाटे से कदवाली, गोरी चिट्टी अम्मा, हमेशा कॉटन की साड़ी, सीधे पल्ले से ढ़ंका हुआ उनका सिर, और चौड़े माथे पर बड़ी लाल बिंदी, जो बाबू जी के बाद भी अपने स्थान पर अटल थी, और उस पर उनका हंसता हुआ चेहरा, उनके वैभव को कई गुना बढ़ा देता। जैसे-जैसे उनकी लिखाई आगे बढ़ रही थी, अम्मा के चेहरे पर एक अजब सा तेज उभर रहा था। हालांकि एक बार फ़िर वे बहुत अधिक बीमार पड़ गईं। जब वे अस्पताल में थीं, तो बिस्तर में लेटे लेटे बस राम-राम करतीं रहतीं। एक दिन मनु से बोलीं 'बेटा अगर हमको कुछ हो जाता है, तो हमारी अधूरी रामायण हमारे साथ ही रख देना, हम उसे पूरी कर देंगे।' मनु को उनकी बात समझ में नहीं आई। वह रोते हुए बोला 'मां आप, रामायण पूरी करेंगी। राम जी आपसे पूरी रामायण सुनना चाहते हैं।' कुछ दिन बाद अम्मा सचमुच में ठीक होकर घर आ गईं और उन्होंने फ़िर आगे लिखना शुरू किया। जब रामायण पूरी हुई, तो मनु ने मंदिर में एक भव्य आयोजन कर, पंडित जी के हाथों रामायण का विमोचन करवाया। बयासी साल की, नई लेखिका - अम्मा, की पहली पुस्तक, सकारात्मक मानस और विश्वास के साथ, आस्था के आचमन और ज़ज़्बे की धुनी से अवतरित - अम्मा की रामायण।

द्वारा: डॉ स्वाति सिंह 
असिस्टेंट प्रोफेसर 
सेंट पॉल इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशन स्ट्डीज, इंदौर

माह अप्रैल 2026 की विशेष गतिविधियाँ

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