Tuesday, 25 November 2025

व्रजेन्द्र नागर की कविताएँ

      1


देखिये 

नजर अंदाज न कीजिए 

भले ही मौसम धूमिल हो 

आपकी नजरों में बने रहेंगे तो

सुधार होगा स्वभाव 

भले हो अपना

पथभ्रष्ट न हो पाएंगे 

राह अंजानी है 

लक्ष्य पा लेंगे 

चुनाव करना है शांति और 

आतंक के मध्य 

किसी एक का, 

कर पाएंगे 

उतार चढ़ाव तो आते रहते हैं 

जीने में 

उत्साह से उफन कर 

बिखर न पायेंगे 

नजरे सीमा पर होगी परिंदा भी

पर न मार पाएगा

मरने के लिए जीते 

रहेंगे 

जल थल नभ का 

आकलन कर 

सकेंगे 

लोग जीने के लिए मरते हैं 

उत्सर्ग कर देते हैं 

तन अपना 

मौत भी उन्हें महान कह 

नवाजती है 

सूचीबद्ध हो जाएंगे अमर 

श्रेणी के मध्य कहीं न कहीं 


व्रजेंद्र नागर 

251 श्री मंगल नगर इंदौर


          2


 माया का फेर

जन्म लेते ही 

रुलाई आ गयी, ये क्या हो गया 

सुरक्षा में कैसे चूक हो गयी

गर्भ में पूर्ण सुरक्षित निश्चिंत थे 

अंतर्निहित थे 

जन्मते ही माया ने घेर लिया 

अभिशप्त हो गए 

मैं का अर्थ तक नहीं पता था 

मिमियाने लगे 

पुलक कर किलकिलाने 

लगे 

मां के अंक में खुद को सुरक्षित 

समझने लगे 

समय मान अंक से दूर क्या कर

दिया 

अब उठकर चलकर दौड़ भाग 

करने लगे 

ये मेरा है कहकर जिद भी करने 

लगे 

वय ने खेलना सिखा दिया 

मन मर्जी करने लगे 

दौड़ भाग कर साक्षर तो बना 

लिया 

मगर महत्व से दूर थे 

कई अवरोधों का सामना कर 

लक्ष्य तलाशने लगे 

आकलन कर चुनने में शिरकत

बानगी थी 

चुनने की सफलता भी तो 

नाज थी 

चुनते चुनते स्वयं ही चुन लिये

गए 

पता लगा ये कांटों का युक्त 

ताज है 

अनुभव ने समझाया ये 

कनक घट विष से भर पूर है 

पी लिया मगर अनजान थे, महादेव 

ना बन सके 


व्रजेंद्र नागर 

251 श्री मंगल नगर इंदौर

No comments:

Post a Comment

माह अप्रैल 2026 की विशेष गतिविधियाँ

माह अप्रैल 2026 की विशेष गतिविधियाँ